खट्टी-मीठी सी ज़िंदगी (मनभावन प्रसंगों सहित) लेखिका: श्रीमती रमा गर्ग, प्रकाशक: मधुशाला प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, भरतपुर; भाषा: हिंदी; पृष्ठ: 168; मूल्य: ₹300 (भारत में), $15 (विदेशों में); प्रकाशन वर्ष (पहला संस्करण): 2026; ISBN: 978-93-7428-028-7
ज़िंदगी हमेशा फूलों की सेज नहीं होती। हर व्यक्ति के जीवन में अच्छी और बुरी दोनों तरह की घटनाएँ होती हैं। इसी तरह, हम सभी को खट्टे-मीठे अनुभवों का सामना करना पड़ता है। इस किताब में 21 अध्याय हैं। हर अध्याय को बहुत सोच-समझकर इस तरह लिखा गया है कि वह पाठकों के लिए दिलचस्प और उपयोगी हो। हर अध्याय में कुछ संस्मरण शामिल हैं जो किताब को जीवंत बनाते हैं। ये सचमुच मनभावन हैं। चूँकि ज़िंदगी कभी एक जैसी नहीं होती, इसलिए हम हर पड़ाव पर कुछ न कुछ सीखते रहते हैं। हर अध्याय के संस्मरणों को भी बहुत सावधानी से चुना गया है। इनमें स्कूल के दिनों से लेकर जीवन के अलग-अलग हिस्सों और मौकों को शामिल किया गया है। ये आज की पीढ़ी को सही संदेश देते हैं। नोक-झोंक हर किसी की ज़िंदगी का हिस्सा होती है। इनमें से कई घटनाएँ हमें हँसाती भी हैं और कुछ सिखाती भी हैं। हालाँकि, ज़िंदगी में रिश्ते ज़्यादा अहम होते हैं। इसके लिए सहानुभूति, बातचीत, जीवन के संघर्षों में दूसरों के लिए त्याग, अपनापन और बातचीत का सिलसिला बनाए रखना ज़रूरी है। बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों के लिए प्यार, परिवार में सबको अच्छा खाना खिलाना और अच्छे रिश्ते बनाए रखना पूरे परिवार को खुश और एकजुट रखने के लिए ज़रूरी है। बुढ़ापे में भी, इंसान कभी-कभी ऐसे लोगों से बात करना और मिलना-जुलना पसंद करता है जिनसे कभी-कभार कोई काम पड़ता हो।
इस किताब का मुख पृष्ठ पेज रंगीन और आकर्षक है। इसकी छपाई बहुत बढ़िया है। किताब की शुरुआत में समर्पण और स्नेह-भेंट, लेखिका का परिचय, लेखिका की कलम से दो शब्द, आमुख, संपादकीय और आभार दिए गए हैं। किताब के आखिर में शुभकामनाएँ और लेखक की दो दूसरी किताबों के मुख पृष्ठ दिए गए हैं। किताब के पिछले कवर पेज पर किताब और लेखक के बारे में थोड़ी जानकारी दी गई है। ये जानकारियाँ पाठकों का ध्यान किताब की खास बातों की ओर खींचती हैं। किताब की भाषा सरल और समझने में आसान है। एक बार हाथ में लेने पर इसे पढ़ने का मन करता है। जब मैंने किताब पढ़ना शुरू किया, तो इसे पूरा किए बिना छोड़ नहीं पाया। मैंने महसूस किया कि इस किताब में लिखा हर वाक्य महत्वपूर्ण है और इसमें सीखने और आनंद लेने के लिए बहुत कुछ है। यह एक प्रेरणादायक किताब भी साबित होगी। किताब में बताए गए किस्से पाठकों के मन पर गहरी छाप छोड़ते हैं। समीक्षक की राय में, यह किताब बहुत तारीफ़ के काबिल है और इसे छात्रों, युवाओं, शिक्षकों, नौकरीपेशा लोगों, और आम लोगों के लिए, पढ़ने और उपयोग में लाने के अलावा, साथ ही दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को तोहफ़े में देने के लिए बहुत उपयोगी है।
----------समीक्षक (Reviewer)---- विजय के. शर्मा